महिलाओं की अस्मत के लुटेरों, एक बार मेरी इस लेख को जरुर पढ़ें


Letter For Rapist: दुनिया भर से प्रतिदिन अनेकों बलात्कार के मामले सामने आते हैं। हमारे भारत देश की अगर बात करें तो आंकड़े बताने की आवश्यकता नहीं, क्योंकि हर भारतीय इस बात से भली-भांति वाकिफ है कि देश में महिलाओं की स्थिती कितनी दयनीय है। हम चिल्ला-चिल्ला कर कहते हैं कि आज नारी सर्वगुण संपन्न हैं। खुद पर आधारित होने की उनमें कूबत है। आज़ाद देश की नारियों की सोच भी काफी आज़ाद हो चुकी है। बावजूद इन सबके महिलाएं हमारे समाज में सुरक्षित नहीं है।

दोस्तों, मैं सिर्फ आप सबसे ये आग्रह करती हूं कि, जब कभी भी आपके मन में हवस का कीड़ा पैदा हो, महिलाओं को उसका शिकार बनाने से पहले अपने अंर्तमन में झांककर सोचें कि उस अन्य महिला की जगह अगर आपकी अपनी मां या बहन होगी तो क्या आप अपने हवस का शिकार उन्हें बनाएंगे ? यकीनन आपका जवाब नहीं में होगा। तो फिर किसी और की मां-बहन की अस्मत को लूटकर आपको क्या मिलेगा? बस कुछ देर के लिए आपके हवस का कीड़ा शांत हो जाएगा। जबकि दूसरी ओर उस बेगुनाह महिला की ज़िंदगी बर्बाद हो चुकी होगी। ये कीड़ा बार-बार आपको किसी की जिंदगी बर्बाद करने को मजबूर करेगा। लेकिन अगर आप अपने हैवानियत वाले सोच पर इंसानियत का चोला डाल लेंगे तो गुनाह करने से यकीनन खुद को रोक लेंगे।

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दोस्तों, दूसरी बात ये है कि अपने उस हवसी कीड़े को शांत करने के लिए आप और भी कई तरह के उपाय अपना सकते हैं। जिससे आपका ये कीड़ा भी शांत रहे और किसी महिला की अस्मत भी ना लुटे। जैसे, आप अपने हवस की भूख को मिटाने के लिए रेड लाइट एरिया का उपयोग कर सकते हैं। वेश्याओं के पास जाकर अपने हवस के भूख को शांत कर सकते हैं। इतना ही नहीं सेक्स ट्वॉयज का उपयोग भी आप कर सकते हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ आप ही किसी के साथ दुष्कर्म कर अपने हवस के कीड़े को शांत करते हैं। बल्कि समाज आप जैसे इंसानों से भरा-पड़ा है। ऐसे में संभव है कि जब आप किसी अन्य की मां-बहनों की अस्मत लूटते हैं तो कहीं अापकी मां-बहने भी किसी अन्य के हवसी कीड़े की शिकार हो जाएं। तब आपको कैसा महसूस होगा?

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क्यों ना आप अपने मन में ये ठान लें कि चाहे कुछ भी हो जाए आप अपने हवसी कीड़े को बेकाबू नहीं होने देंगे। अपने उपर हावी नहीं होने देंगे, जो आपको गुनहगार बनाता है, बलात्कारी बनाता है, किसी के अस्मत का लुटेरा बनाता है। अब सोचने वाली बात है कि ये कीड़ा होता तो हर इंसान में है लेकिन किसी ने उसपर काबू कर रखा है, जिससे वो इंसान गुनहगार नहीं बनता और समाज में प्रतिष्ठा के साथ अपनी आत्मा से निगाहें मिलाकर जीता है। जबकि आप जैसे अस्मत के लुटेरे अपनी आत्मा से भी निगाहें नहीं मिला पाते होंगे। तो ऐसा काम ही क्यों करें? जिससे इस छोटी सी ज़िंदगी में दुख ही दुख बरस पड़े।

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आज आप क्यों ना ये ठान लें कि किसी भी सूरत में आप बलात्कारी नहीं बनेंगे। और ना किसी को बनने देंगे। आखिरकार अपने मन पर जीत हासिल करने वाला इंसान ही दुनिया का सबसे सुखी इंसान होता है।


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