माफ कर दिया


माफ कर दिया | Motivational inspirational Hindi Story

माफ कर दिया | Motivational and inspirational Hindi Story : जनवरी 1908 में अंग्रेजी सरकार ने एक आदेश पारित किया कि भारत के लोगों को ट्रांसवाल में ना रहने दिया जाए. गांधी जी ने इसके विरुद्ध सत्याग्रह आंदोलन छेड़ा. गोरों को यह बहुत बुरा लगा. उन्होंने मीर आलम नामक व्यक्ति को बहका दिया और उनके बहकावे में आकर वह गांधी जी को मारने के लिए तैयार हो गया.

एक दिन गांधीजी स्क्वायर स्थित एशियाटिक ऑफिस जा रहे थे. अचानक मीर आलम लाठी लिए आया और अकस्मात गांधी जी पर प्रहार किया. पहले लाठी लगते ही गांधीजी हे राम कहकर गिर पड़े. मुंह के बल गिरे थे, एक दांत टूट गया और बहुत सी चोट आई. मीर आलम ने गिरे हुए गांधी जी पर और लाठियां चलाई.

इतने में इसप मियां और थ्मबी नायडू आ पहुंचे. उन्होंने शोर मचाया तो गोरे लोग आ गए. मीर आलम अकेला नहीं थे. उसके साथ दो और भी लोग थे. गोरे लोगों को आते देख वे सब भागे किंतु पकड़ लिए गए. गांधी जी मूर्छित थे उन्हें उठाकर पास ही के कार्यालय में पहुंचाया गया.

होश आते ही उन्होंने पूछा मीर आलम कहां है. लोगों ने कहा वह पकड़ लिए गए हैं. गांधीजी ने कहा उन्हें छुड़ाना चाहिए. चोट ज्यादा थी. डाक्टर तथा दूसरे लोग हठ कर रहे थे कि गांधी जी को चुपचाप लेटे रहना चाहिए. किंतु गांधी जी ने उसी समय जनरल को तार भेजा. मीर आलम और उसके साथियों को छोड़ दिया जाए. उन्होंने मुझ पर जो हमला किया उसके लिए मैं उंहें दोषी नहीं मानता. उन पर मुकदमा ना चलाया जाए.

यह तार पाकर एक बार तो वह सब छोड़ दिए गए किंतु वहां के गोरे नागरिकों ने इस पर आपत्ति की. उन्होंने लिखा, यह गांधी जी का व्यक्तित्व मामला नहीं है. दिनदहाड़े बीच सड़क पर इस प्रकार आक्रमण करने वालों को दंड मिलना चाहिए. कानून अपना काम करता है. अपराधी फिर पकड़े गए. गांधीजी ने बहुत बार कोशिश की उन्हें छुड़ाने का पर न्यायालय ने उन्हें 3 महीने की सख्त सजा दी.

जेल से छूटने के महीने भर बाद मीर आलम एक सभा में गांधी जी से मिला. उसने अपने अपराधों की क्षमा मांगी. गांधी जी बोले, मैंने तुम्हारे विरुद्ध कभी कुछ नहीं सोचा. मीर आलम के पास प्राश्चित के अतिरिक्त कुछ नहीं था.

इसी तरह, एक बार अफ्रीका में फुटपाथ पर चलते चलते एक संतरी ने गांधीजी को धक्का देकर गिरा दिया और गाली देता हुआ बोला तुम्हें दिखाई नहीं देता. क्या हिंदुस्तानियों के लिए यह फुटपाथ बनवाया गया है ? बिना कुछ बोले गांधी जी उठे और अपने कपड़े झाड़ते हुए एक तरफ खड़े हो गए.

कोटल नामक उनका एक अंग्रेज मित्र भी उनके साथ था. उसने गांधीजी को पिटते देखा तो वह संतरी पर बरस पड़े. कोटल ने गांधीजी से कहा, आप इस दोस्त पर मुकदमा चलाए. मैं आप की गवाही दूंगा. गांधी बोले, मुकदमे से तो इनका गुस्सा और बढ़ेगा. यह हब्शियों को भी तो ऐसे ही धकेल देते हैं. फिर मेरा सिद्धांत है कि मैं अपने कष्ट के लिए किसी पर मुकदमा नहीं चलाता.

कोटल ने संतरी को बताया कि यह कोई मामूली आदमी नहीं अपितु बैरिस्टर गांधीजी हैं. संतरी का गुस्सा ठंडा पड़ गया क्योंकि उन दिनों अफ्रीका में गांधी जी की काफी चर्चा थी. संतरी गांधी जी के पैरों पर गिरकर माफी मांगने लगा. गांधी जी ने उन्हें सम्मान पूर्वक उठाया और गले लगा लिया.


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