शादी के 7 फेरे या वचन क्या है ? जाने इन वचनों का महत्व !


शादी के 7 फेरे या वचन जाने क्या है ? जाने इन वचनों का महत्व !
शादी के 7 फेरे या वचन जाने क्या है ? जाने इन वचनों का महत्व !

विवाह हर किसी के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. हिंदू संस्कृति की यदि हम बात करे तो विवाह संस्कार 16 संस्कारो में से एक है. विवाह में कई सारे रस्में और रिवाज होते है. उन सभी का अपना एक महत्त्व होता है.

विवाह में लिए गये 7 फेरे भी उन्ही में से एक है. समस्त पूजन, समाप्ति आदि हो जाने पर भी जब तक कन्या वर के बाई तरफ नही बैठती तब तक कन्या कुवारी ही कहलाती है. इसके अतिरिक्त जब तक . . . एक दूसरे के . . लेकर वचन नहीं देते तब तक कन्या वर की अर्धांगिनी नही बनती. जो भी जोड़ा इन सात वचनों को ध्यान से सुनकर इनका पालन करता है. उनकी शादी शुदा जिंदगी में कभी कोई परेशानी नही आती है.

शादी चाहे अरेंज्ड मैरिज हो या लव मैरिज दोनो ही तरह से शादी करने वाले जोड़ो को इन वचनो को लेकर एक दूसरे के साथ निभाना चाहिए. यह चीज़ अक्सर देखी गयी है की वर वधू को शादी के सात फेरो का मतलब पूरी तरह से नही पता होता है. जिसके कारण वो शादी के सभी वचनो को पूरी तरह से पालन नही कर पाते है. और इसके महत्वो को नही जानने के कारण भी कुछ लोग कोर्ट मैरिज कर लेते है.

लेकिन हमारी हिंदू संस्कृति में सात अंक का बहुत महत्त्व है और इन्हे शुभ माना गया है. सातवा अंक सभी मंगल कार्यो के लिए शुभ माना गया है. इसलिए विवाह में भी कन्या अपने वर से सात वचन मांगती है. यदि आप उन साथ वचनो और उनके अर्थो के जानने में उत्सुक है तो आगे पढ़िए शादी के 7 फेरे या वचन जाने क्या है और इन वचनों का महत्व !

शादी ना केवल दो लोगो के बल्कि दो परिवरो का भी मिलन है. पति पत्नी को अपने दांपत्य जीवन को चलाने के लिए सामने वाले का पूरा ख्याल रखना होता है. जिसका वचन वे विवाह के दौरान ही दे देते है तो आइए जाने 7 फेरे या वचन जाने क्या है

पहला वचन

विवाह में यह कन्या द्वारा वर से लिया गया पहला वचन है. इसमे वधू अपने वर से कहती है की आप जब भी कभी तीर्थ यात्रा पर जाओ, तो मुझे अपने साथ में लेकर चलना. किसी भी व्रत उपवास या दान धर्म को आप करे तो उसकी सहभागी मुझे भी बनाना. यदि आप इन वचन को स्वीकार करते है तो मैं आपकी अर्धांगिनी बनना स्वीकार करती हू.

किसी भी तरह के धार्मिक पूजा पाठ में पति पत्नी का होना बहुत ज़रूरी माना गया है. इस वचन के माध्यम से पत्नी की हर स्थान पर सहभागिता बताई गयी है.

दूसरा वचन

दूसरे वचन का अर्थ है की; पत्नी अपने पति से वचन मांगती है और कहती है जिस तरह आप अपने माता पिता का आदर और सम्मान करते है. वैसे ही आप मेरे माता पिता का भी सम्मान करेंगे और कुटुम्ब धर्म का पालन करते हुए ईश्वर की पूजा करेंगे. इसी वचन के साथ में आपकी अर्धांगिनी बनना स्वीकार करती हू.

इस वचन के द्वारा कन्या की दूरदृष्टि का आभास होता है. इस वचन को ध्यान रखते हुए वर को कन्या के परिवर के साथ सदव्यहवार करना चाहिए.

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तीसरा वचन

तीसरे वचन के माध्यम से कन्या अपने पति से वचन मांगती है और कहती है की आप जीवन की आने वाली तीनो अवस्थाओ में जैसे युवावस्था, प्रौढ़ावस्था, व्रधवस्था में मेरा और कुटुम्ब के साथ घर में रहने वाले पशुओ का भी पालन पोषण करोगे तो में आपकी अर्धांगिनी बनना स्वीकार करती हू.

चौथा वचन

शादी के 7 वचनो में से चौथे वचन में पत्नी अपने पति से कहती है की अभी तक आप घर परिवार की चिंता से पूरी तरह मुक्त थे. अब जब हम विवाह के बंधन में बंधने जा रहे है तो भविष्य में होने वाली परिवार की सभी ज़रूरतो को पूरी करने की ज़िम्मेदारी आपके कंधे पर होगी. आप इस वचन को दे तो में आपकी अर्धांगिनी बनना स्वीकार करती हू.

इस वचन के माध्यम से पत्नी पति को उसके दायित्व का बोध करवाती है. इस वचन से यह भी पता चलता है की पुत्र का विवाह तब करना चाहिए जब वो अपने पैरो पर खड़ा हो.

पाँचवा वचन

पाँचवे फेरे का पाचवे वचन में पत्नी अपने पति से कहती है की घर में होने वाले हर विवाह, व्यवहार, लेन-देन आमदनी और खर्च करते वक्त आप मेरी भी सलाह लेंगे, तो में आपकी अर्धांगिनी बनना स्वीकार करती हू.

इस वचन से पत्नी के अधिकारो का पता चलता है. यदि किसी भी कार्य को करने से पहले पत्नी की सलाह ली जाए तो इससे पत्नी का सम्मान बढ़ता है. और पत्नी को अपने अधिकारो के प्रति संतुष्टि का अनुभव होता है.

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छठा वचन

इस वचन के ज़रिए कन्या कहती है की यदि में अपने सखियो के साथ या फिर किसी और भी परिचित स्त्री के साथ बैठु तो आप वहां मेरा अपमान नही करेंगे.

इसके अलावा यदि आप जुआ और अन्य किसी बुरी संगत से दूरी बनाए रखेगे तो मैं आपकी अर्धांगिनी बनना स्वीकार करती हू. यह वचन हर पति को पत्नी को देना चाहिए.

सातवा वचन

इस आखरी वचन में पत्नी अपने पति से कहती है की आप मेरे अलावा हर स्त्री को माता और बहन के समान समझोगे. पति पत्नी के बीच के प्रेम में किसी और को भागीदार नही बनाओगे. सदा मुझ पर ही अपना प्रेम बनाये रखोगे. यह वचन सुखी जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. इस वचन से केवल वर्तमान ही नही अपितु भविष्य भी सुखदपूर्ण बीतेगा.

इन वचन के माध्यम से कन्या अपने आने वेल भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रयास करती है. वो अपने पति से कहती है की यदि आप इस वचन का पालन करोगे तो मैं आपकी अर्धांगिनी बनना स्वीकार करती हू.

इसके बाद वर भी वधू से अपने लिए एक वचन माँगता है, की तुम मेरी सलाह लेकर चलोगी, मेरे विश्वास को हमेशा बनाए रखोगी और मुझसे बात करते समय मधुर वचनो का प्रयोग करोगी, साथ ही घर परिवर से संबंधी सारी जिम्मेदारियों में मेरा साथ दोगी, सास ससुर की सेवा और हमेशा पत्नी-व्रत का पालन करते हुए ईश्वर भक्ति में लीन रहोगी तो में तुम्हे अपने जीवन का हिस्सा बनाते हुए अपनी अर्धांगिनी होने का अधिकार देता हू.

क्या है सात फेरे लेने की वजह

जैसा आपको बताया गया है हिंदू धर्म के अनुसार सात अंक बहुत शुभ माना गया है. इसका एक कारण यह भी है की भगवान ने इंद्रधनुष में सात रंग बनाए है, संगीत में सात सुर दिए है.

ऐसी मान्यता है की सात सुरो के मिलने से संगीत बनता है, जिसकी धुन से जीवन सुरमयी हो जाता है. उसी तरह सात रंगो के मिलने से संसार की सुंदरता और बढ़ जाती है. वैसे ही सात फेरे लेने के पीछे ये मान्यता है की सात फेरे लेने से विवाहित जोड़ो के जीवन में भी नये रंग, सुख, आनंद, सुंदरता, और प्रेम हमेशा बना रहता है. इन सात वचनो की एक खास बात यह भी है की ये सारे वचन कन्या द्वरा लिए जाते है. उसके बाद कन्या पत्नी बनकर जीवन भर साथ देने सदा के लिए पति के घर आ जाती है.

यह सात वचन जीवन की हर दुविधा को समाप्त कर देते है. अगर प्रत्येक जोड़ा इन वचनो का पूरी तरह से पालन करे तो दहेज जैसी कुप्रथा की नौबत ही नही आएगी. ना ही कोई नई नवेली दुल्हन दहेज की आग में जलकर मरेगी, ना ही परिवार टूटेंगे और ना ही किसी को भी विवाह करने पर कभी भी पछतावा होगा.


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